चर्चा बैठक का महत्त्व
चर्चा बैठक का महत्त्व
[ चर्चा बैठक का महत्त्व ]
"अभी से चर्चा बैठक मे जाते जा सेवक, नही तो फिर पछताना है !"
"खिला पिलाकर जो देह बनाया, यह भि अग्नी मे जलाना है !"
चर्चा बैठक का बहोत बडा महत्त्व है इसलिए महानत्यागी बाबा जुमदेवजींने चर्चा बैठक कि सुरूवात कि है. चर्चा बैठक मे एक भगवान कि चर्चा होति है और भगवान के गुनगाण गाऐ जाते है. अगर हम भगवान को सामने रखते हुए चर्चा बैठक मे मन लगाकर बैठते है तो हमारे बहोत सारी दुवाधाए, भावनाए चर्चा बैठक मे नष्ट हो सकते है क्यौकि हमे यह भगवान की दिशा दिखाति है ! सारे सेवको को चर्चा बैठक का महत्त्व समजना होगा क्योकि बाबा का आदेश था की हर गाव मे भगवान कि चर्चा बैठक होनी चाहीए और इसलीए हमे चर्चा बैठक मे जाना चाहीए !
लेकीन बहोत सारे सेवक बोलते है कि चर्चा बैठक मे क्या जाना है ? वहा पर सिर्फ तत्त्व शब्द नियम ही पुछते है और यह विचार ऊनके मन मे आता है कि यदि हम चर्चा बैठक मे नही जाते तो क्या हम त्तव शब्द नियम से नही चलते! लेकिन सेवक बाबाके इस छोटे से आदेश का पालन नही कर सकते तो इतने बडे त्तव शब्द नियम का पालन कैसे कर सकते है ? और बाबा का आदेश था कि हर सेवक ने चर्चा बैठक मे जाना चाहीए !
त्तव शब्द नियम मे पूरे वेद पुराण का ज्ञान है ! इतना बडा त्तव शब्द नियम मे रस है ! हम जब चर्चा बैठक मे जाते है तो सारे सेवक त्तव शब्द नियम कि गाथा बार बार सुनाते है और यह सुनकर हमारे शरिररुपी पत्थर को उन विचारोसे तरासा जाता है, जीससे शरिररुपी पविञ मुर्ति बनति है ! उससे मन और बुद्धी उत्साहीत होगी और आपके जीवन मे सुंदर योग आयेगा ! जिससे हमारे मन मे आत्मसम्मान , आत्मसंयम, और आत्मसुझाव निर्माण होगा ! यह चर्चा बैठक का महत्त्व है!
हमे चर्चा बैठक मे जाना चाहीए क्योकि वहा स्वंय भगवान बाबा हनुमानजी उपस्थित रहते है, हमे चर्चा बैठक मे भगवान का सत्संग सुनने को मिलता है, हमे भगवान के उपस्थिती मे बोलने का अवसर मिलता है, चर्चा बैठक मे सारे सेवक अपने अनुभव बताते है और अपनि गलतिया बताकर भगवान से माफी मांगते है और भगवान को वचन देते है कि इसके बाद ऐसी गलति हम कभी नही करेंगे और यह हमारा बहोता बडा सौभाग्य है ! इससे संसाररुपि भवसागर मे तैरने कि कला चर्चा बैठक से आति है !
हम सभी सेवको को चर्चा बैठक मे जाकर अपने जीवन मे परिवर्तन लाना है क्योकि मानवधर्म यह परिवर्तन का धर्म है! बाबा अपने मार्गदर्शन मे कहते थे कि युग परिवर्तन हो रहा है इसलीए हमे मरते दम तक परिवर्तन करना पडेगा !
चर्चा बैठक मे इतनि ताकत है कि जहा पर आत्मज्ञान मिलता है, विचारो मे क्रांती आति है, मन शांत होता है, जहा पर गिरता हुआ सेवक संभल जाता है ! चर्चा बैठक हमे नम्रता सिखाती है, अहंकार को नष्ट करती है ! चर्चा बैठक मे सेवक का आत्मबल बढता है ! ह्दय सत्य मर्यादा प्रेम से स्फुरीत होगा ! आप भि खडे होकर बोलना सिखोगे, और आपको भि लगेगा कि हमे भि त्तव शब्द नियम से चलना चाहीए !
चर्चा बैठक मे जाना यह भि एक सतकर्म है ! आप धन कमाने के लिए, पद खुर्ची पाने के लिऐ कुछ कर्म करते हो लेकिन वह कर्म नष्ट होने वाले है क्योकि संसार कि कोई भि चिज आपकि नही हो सकति, वह एकदिन छुटनेवाली है ! लेकिन एक बार आप भगवान के बन गये तो भगवान से आपको कोई दुर नही कर सकता !
चर्चा बैठक यह एक सिस्टीम है और मानवधर्म सिस्टीम से चलता है, अगर मानवधर्म को समझना है तो आपको चर्चा बैठक मे जाना पडेगा क्योकि चर्चा बैठक यह मानव मंदिर सजाने का सतसंग है ! चर्चा बैठक आपको एक नई दिशा दिखाऐगी ! जिसे आप धिरे - धिरे खडे होकर बोलना सिखोगे, और आपके ह्दय से जो भि वाणी निकलेगी यह वाणी इतानी उच्चप्रति कि होगी की जो भि सुनेगा वह सेवक मंञमुग्ध हो जायेगा और उसकी अंतरआत्मा पविञ हो जायेगी और बाबाने हर मानव मे भगवान को देखा है ! इसलीए मन चित्त और आत्मा को पविञ करना होगा और यह सिर्फ चर्चा बैठक से हो सकता है !
चर्चा बैठक से चित्त खो जाता है, मन निर्मल हो जाता है, बुद्धी उत्तम हो जाती है और मन ध्येयवादी बन जाता है ! उस सेवक को जीवन मे किसि से भि धोखाधडि करने कि जरूरत नही, इतना मजबूत वह सेवक चर्चा बैठक से बन जाता है ! इसलीए हमे पुरे परीवार के साथ चर्चा बैठक मे जाना चाहीए !
बाबा का आदेश था कि सभी सेवक ऐकता का पालन करे , क्योकि हम रोज बोलते है कि अपने परिवार मे और सेवक मे ऐकता का पालन करूंगा और चर्चा बैठक हमे संगठित करके ऐकता सिखाती है, अगर आप चर्चा बैठक मे हमेशा जाते है तो आपको ऐकता कि ताकत का पता होगा !
इसलीए हमे चर्चा बैठक का लाभ अपने परिवार के साथ लेना चाहीए ! अगर हम पुरे परिवार कै साथ सप्ताह मे, पंधरा दिनो मे, महीने मे दो घंटे चर्चा बैठक को देते है तो हमे परमात्मा का ज्ञान मिलता है, जिससे हमारी मन कि प्रसन्नता बढति है! इसलीए सभि सेवको ने आजही संकल्प करना चाहीए की हमेशा चर्चा बैठक जाते रहेंगे !
लेखन - श्री प्रदिप मते
मु. पुलगाव
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